संगी मन थोरुक बढे चलव गा
फोकट के बिजली ल तोरे घर मे राख
सारी
मोर कुंवर कन्हैया...!
अपन गोठ...
तपत कुरु भइ तपत कुरु
बियंग : मोबाईल मास्टरिन
मुक्तक..
साखी....
जमुनिया के डार : धनी धर्मदास के गीत
नयना नीर भरे
छत्तीसगढ़-गौरव
दमांद बाबू दुलरू
धर ले कुदारी
मोर भाखा
तैं ह आ जाबे मैना
जागरण गीत
महर महर महकय माटी
तैं भले बिसर दे
मोर संग चलव रे
रिमझिम बरसय बादर
तैं भौंरा बन के आजा
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