कैसे पाये चिट्ठाजगत सक्रियता मे टाप 20 : जुगाड 1 अप्रैल से प्रभावी

कई हिन्दी ब्लॉगरों को यह चिंता खाये जा रही है कि लगातार लिखने, मित्रो के ब्लॉगों मे लिंक पे लिंक चिपकाने के बावजूद उनका ब्लॉग चिट्ठाजगत सक्रियता मे टाप 20 मे स्थान नहीं पा रहा है. हमने इसका तोड ढूंढ लिया है. बस तीन स्टैप के सरल जुगाड के बाद आपके चिट्ठे का चिट्ठाजगत सक्रियता 11 दिखाने लगेगा. आप चाहें तो इसे 1 भी कर सकते है.

1. सबसे पहले अपने ब्लॉग मे लगे चिट्ठाजगत सक्रियता बटन का स्क्रीन शाट लेकर फोटो शाप मे एडिट करें.
2. चिट्ठाजगत सक्रियता बटन के सामने जो सक्रियता संख्या लिखा है उसे मिटा कर अपने मनमाफिक संख्या दर्ज कर लेवें और बटन सेव कर लेवें.
3. अब इस बटन को अपने ब्लॉग के उपयुक्त जगह जहां पाठक़ो को यह दिखे वहा लगा देवें.
4. अब अपना ब्लॉग देखें.


इस सम्बन्ध मे मेरा सुझाव है कि इसे एक अप्रैल को ही आजमायें क्योंकि ज्योतिषियों का कहना है कि इसी दिन से गूगल बाबा मुफ्त मे उपलब्ध एक ब्लॉग के 500 रुपये महीना के हिसाब से शुल्क लगाने वाले हैं.

दलित साथी

तेजी से कांक्रीटमय होती शहरी धरती में कहीं कोई पेड भी है जिसे मैंनें लगाया है.

पिछले वर्ष मेरे घर के आम के पेड में कुल जमा दो आम फले थे तब यह आम एक पोस्‍ट इस आम में क्‍या खास है भाई .... ?  बनकर खास हो गया था और इसका जिक्र प्रिंट मीडिया में भी हुआ था. और हम अतिप्रशन्‍न हो गए थे कि चलो अब घर के दरवाजे-खिड़की-चौखट के संबंध में भी पोस्‍ट बना कर पब्लिश किया जा सकता है ऐसे पोस्‍टों को न केवल पढा जाता है वरण इसकी चर्चा प्रिंट मीडिया में भी होती है. 


कांक्रीट के घने जंगलों के बीच
मेरी छोटी बगिया मुस्‍काती है
और जब कोयल हाईब्रिड
बौर आये आम के पेड पर
बैठकर कूकती है,
गौरैया के झुंड फुदकते हैं
तब मेरा श्रम
सार्थक नजर आता है
तेजी से कांक्रीटमय होती
शहरी धरती में
कहीं कोई पेड भी है
जिसे मैंनें लगाया है.

संजीव तिवारी

बधाई देंवें यह पोस्ट हमारी 68 वीं पोस्ट है ......

पिछले पोस्ट में राजकुमार ग्वालानी जी के पोस्ट में आई टिप्पणी को प्रकाशित करने के बाद ब्लागवाणी में हाट लिस्ट के तीसरे क्रम में अपने 'घुरूवे' को पाकर मुझे ब्रह्मज्ञान हुआ कि मेरे जैसे ब्लॉगर के लिये एलीट टाईप पोस्ट एवं टिप्पणी व्यवहार करना अच्छा है. सो हम सोंचने लगे कि अपनी ब्लॉग सक्रियता बढाने और चिट्ठाजगत सक्रियता संख्या कम करने के लिए रोज कुछ ना कुछ पोस्ट करना अत्यंत आवश्यक है. यदि पोस्ट में एकाध दिन चूक हुई तो बडा भारी संकट आ जावेगा, हो सकता है कि हमारी सक्रियता संख्या विरोधी दल भाजपा वाले कम कर दें. ऐसे में तो हमारे एलीट ब्लॉगर कहलाने की सारी कोशिशे धरी की धरी रह जावेगी.

इसलिए आज भी कुछ लिख ही दें. पर शीर्षक क्या दें ........ ? .... मठाधीशो को चुनौती ......, बधाई देंवें यह पोस्ट हमारी 68 वीं पोस्ट है ......हॉं यह ठीक है.

साथियों इस ब्लॉग से ब्लॉगिंग करते हुए हमें अभी दो साल हो गए हैं और हमने इस बीच 67 पोस्ट लिखें हैं. हॉंलाकि हमने इस ब्लॉग को संकलको मे पजीकृत एक दो दिन पहले ही करवाया है, इसके पहले यह ब्लॉग सर्च इंजन के सहारे पाठको के बीच जा रही थी. फिर भी हमने लिखना नहीं छोडा था, अजी हां.... दूसरों का लिखा को यहां पब्लिश करना. वैसे भी हम अपने किसी भी ब्लॉग में स्वयं ज्यादा नहीं लिखते दूसरे लोगों का लिखा ही पब्लिश कर देते हैं. अरे भई अपना लिखा चिपकाओ कि दूसरों का लिखा चिपकाओ कहलायेंगें तो ब्लॉगर ही ना. तो साथियों विषय से विषयांतर ना होते हुए हम बता रहे थे कि इतने कम समय में हमारे चिट्ठाजगत सक्रियता की संख्या है 1931 एवं हवाले कडी है 0. जिस हिन्दी ब्लागजगत में 20000 चिट्ठे हो वहां सक्रियता संख्या 1931 पाना कोई कम बडी बात नहीं है. तो भाईयों इसी बहाने दे दो टिप्पणियां हमें भी हमारी अदाये हसीं हो कि ना हो हमारा कोइ महबूब हों कि न हों, आप फुरसद अवश्य निकालो टिपियाने का और जब टिपियाओगे तो सुन्दर सुवासित समीर हमारे एलीट मन में भी बहेगी.

साथियों विषय से विषयांतर हुए बिना हम बतलाना चाहते हैं कि 24 फरवरी 2008 से एक फोटू को पोस्ट बनाते हुए हमने इस ब्लॉग को शुरू किया था. इस फोटू को पब्लिश करने के पीछे हमारा उद्देश्य ही यही था कि लोग इस फोटू को देखें और जानें कि हमारा परिचय छत्तीसगढ़ के जनगीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा से भी है. और हॉं इस ब्लाग मे अपना अलंकरण 'झोंकते' फोटू भी इसीलिये लगाया कि लोग हमारे पोस्ट को पढे बिना भी जान जायें कि हम एलीट टाइप लोग हैं. जैसे ठेलों में ठेला वाले भईया लोग मंत्री और अभिनेताओं के साथ खिंचाये फोटूओं को टांगे रहते हैं वैसे ही हमने अपने ब्लॉग में इसे चिपका दिया है.

दुख तो ये भी है कि इतने बडे अलंकरण मिलने के बाद भी हमारे गुट के कोइ भी ब्लागर साथी ने हम पर केन्द्रित पोस्ट भी नही लिखा. क्या करोगे भाई सबको अपन अपना दुकान चलाना है और सब गल्ले मे ही बैठेंगे कहते है, समान दिखाने वाला कोइ भी नही. एसे में मेरा मठाधीश बनने का सपना कैसे पूरा होगा, पर क्या करें; अभी परिस्थितिया प्रतिकूल है. सुना है कि शनि की वक्र दृष्टि हम पर है. शर्मा जी को भी हमने अपनी कुंडली दिखा दी है, उनका कहना है कि अभी राजयोग नही आया है.

जब तक हमारा राजयोग नहीं आ जाता तब तक हम 'अगोर' रहे हैं. . . . खैर कुछ ब्लॉगर तो जान ही गये कि हमारा संबंध लक्ष्मण मस्तुरिहा जी से है और हमे राजभाषा अलंकरण भी मिल चुका है.

टॉप ब्लौगर बन भी जाओगे तो क्या उखाड़ लोगे? - टेस्ट पोस्ट

ख़ुशी है कि यहाँ की असलियत
आपको जल्दी समझ आ गयी.
यहाँ गुटबाजी ही चलती है.
इस समय यहाँ कई गुट बने हुए हैं.
कमाल तो ये है कि
वही गुटबाजी का विरोध भी करते हैं.

अदा एंड खुशदीप ड्रामा कंपनी 
ताऊ एंड समीर मदारी पार्टी
फुरसतिया खड़ूस मंच
तस्लीम तमाशा कंपनी

ब्लागरी न हुयी
भांडगिरी हो गयी
टॉप ब्लौगर बन भी जाओगे
तो क्या उखाड़ लोगे?

बेनामी नें कहा
राजनीति ब्‍लॉग के पोस्‍ट क्या ब्लाग जगत में भी मठाधीशों का राज है से साभार

बहुत नाइंसाफी है .......... ये हाथ हमें दे दे ठाकुर ....... आई पी एडरेस पता कर लेने वाले भाई लोग कहां हैं, तुरतै पता करें कि ये बेनामी कउन है जी.पिछवाडे का कापीराईट है लगता है इसके पास.

अभिव्यक्ति की आजादी

"कला जानते हो ?"
कैनवास में
तूलिका से आडी तिरछी रेखाओं
के बीच
नारी जननांगों
को उकेरते हुए
उसने मुझसे कहा.

आधे कटे सेव
और
एक जोडी पपीते
के त्रिभुज
से विस्‍तृत
देह
के चित्र में
मैं, कला खोजने लगा.


पत्थरों में उकेरी प्रतिमायें
स्मृति में
धुऑं धुऑं अस्पष्ट.

"अभिव्यक्ति की आजादी
चाहने वाले लोग
देश की पुलाव में
कंकड की तरह .."

कला ना सहीं
पुलाव खाते हुए
मैं कंकड का
दुख जानता हूँ
खाने में कंकड अच्छे नही लगते.

संजीव तिवारी
(गुगल से साभार विभिन्‍न चित्रों का कोलाज )

याद रखना चाहता हूँ मरहम लगाने वालों को

कितने ज़ख़्म दिये हैं तूने
कितने ज़ख़्म सहे हैं मैंने
मैं जल्दी भूल जाना चाहता हूँ
बस
याद रखना चाहता हूँ
मरहम लगाने वालो को
क्योंकि
उन्हीं के सहारे
तो, जी रहा हूँ मैं.

संजीव तिवारी

महिला दिवस : तुम्‍हे मुबारक ये दिवस

दिवस कहॉं
सूर्य का आलोक है

भोग आरक्षण
सम्‍मान की विलासिता
सब, तुम्‍हारे लिये
मेरे लिये तो
बस, जायों को पेट भर रोटी
हिम्‍मत भर मेहनत
देह भर नेह
इसी में सिमटा
मेरा सारा लोक है

नहीं कर सकती मैं तुम्‍हारा स्‍वागत
आंखों में आंसू
अंजुरी में फूल भर कर
तुम्‍हे मुबारक ये दिवस
और दिवस के लुभावने स्‍वप्‍न
मुझे तो बरसों जागते रहना है
स्‍वप्‍न को किसी मंजूषा में धर कर.

संजीव तिवारी

संगी-साथी

ब्‍लॉगर संगी