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सारी

सारी

आजकल रोज सरी बिहनीया अ‍उ संझा दानेश्वर बबा के कविता ला पढत हव बने सुघ्घर लिखे हवय !! आज पढव उंकर एक ठीन रोमांटिक गीत अपन सारी बर ॥ मोर सारी ...
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संगी-साथी