"गुरतुर गोठ" ला समर्पित एक ठन रचना...... सबले गुरतुर गोठियाले तैं गोठ ला आनी बानी के अंधरा ला कह सूरदास अउ नाव सुघर धर का...
Read More
Home / सुकवि बुधराम यादव..
Showing posts with label सुकवि बुधराम यादव... Show all posts
Showing posts with label सुकवि बुधराम यादव... Show all posts
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे
जइसन करम करबे फल वोइसनहे पाबे बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे लंद्फंदिहा लबरा झबरा के दिन थोरके होथे पिरकी घलव चकावर करके मुड़ धर के रोथे...
Read More
एक दिन जाना हवय इंहा ले...
एक दिन जाना हवय इंहा ले सबला ओसरी पारी तन कैसे कब कहाँ ये ककरो हाथ नहीं संगवारी अजरा, जतखत, परे डरे कस का बिरथा जिनगानी खरतर, गुनवंता, धनवंत...
Read More
संगी मन थोरुक बढे चलव गा
अब झन करव अबिरथा अबेर गा संगी मन थोरुक बढे चलव गा भाई मन चिटुक बढे चलव गा !! अतियाचार करिन बैरी जब तुम निचट देह डारेव ! सुमता छांड अपुस मा ...
Read More
मोर कुंवर कन्हैया...!
जन्माष्टमी के पावन बेरा मा...परसतुत हे॥ श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें .... मोर ...
Read More
अपन गोठ...
सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब म...
Read More
नयना नीर भरे
नयना नीर भरे कोई फिर ना झरे नाही कोई किसी को छले आओ सबसे से मिले गले..... इस चमन में अमन की वो गंगा बहे जन गण सदियों सलामत औ चंगा रहे धरा ध...
Read More
महर महर महकय माटी
............ महर महर महकय माटी......... महर महर महकय माटी मोर लहर लहर लहरावय धान ! खेत मेढ़ मा ठाढे मगन मन मुचुर मुचुर मुसकावय किसान !! ...
Read More
तैं भले बिसर दे
..................... तैं भले बिसर दे .............. तैं भले बिसर दे मोला गियां, तोर सुरता गजब आवत हे ! घरी घरी दिन छिन पल पल, मोर जियरा ल ...
Read More
रिमझिम बरसय बादर
जोहार भाई मन ला.....! सावन भादो म एक ठन गीत भेजत हवं अनंद लव अउ अपन बिचार देहव.....!! .............................. समीर.. .............
Read More
Subscribe to:
Posts
(
Atom
)