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मोर कुंवर कन्हैया...!

जन्माष्टमी के पावन बेरा मा...परसतुत हे॥ श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें .... मोर ...
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अपन गोठ...

अपन गोठ...

सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब म...
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मुक्तक..

मुक्तक.. पर के पीरा हा जेकर हिरदे मा जनावत हे पर के पीरा ल जौन अपन कस बनावत हे ! ऐसनहा मनखे, मनुख नोहय देवता ये पर के पीरा हरत जौन जनम प...
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साखी....

साखी .... एक झन के जन्माये एक अँगना मा खेलेन बाढें ! हिन्दू सिख ईसाई मुल्ला फेर कैसे बन ठादें !! जनधन पाके अतियाँवय अउ पद पाके गरुवाय...
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नयना नीर भरे

नयना नीर भरे कोई फिर ना झरे नाही कोई किसी को छले आओ सबसे से मिले गले..... इस चमन में अमन की वो गंगा बहे जन गण सदियों सलामत औ चंगा रहे धरा ध...
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जागरण गीत

भाई समीर यादव जी ह हमर धरती के मया म सुकवि बुधराम यादवजी के ये जागरन गीत गुरतुर गोठ के संगी मन बर भेजे हे । जागौ किसान जागौ जवान हमर छत्‍ती...
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महर महर महकय माटी

............ महर महर महकय माटी......... महर महर महकय माटी मोर लहर लहर लहरावय धान ! खेत मेढ़ मा ठाढे मगन मन मुचुर मुचुर मुसकावय किसान !! ...
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संगी-साथी