"गुरतुर गोठ" ला समर्पित एक ठन रचना...... सबले गुरतुर गोठियाले तैं गोठ ला आनी बानी के अंधरा ला कह सूरदास अउ नाव सुघर धर का...
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बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे
जइसन करम करबे फल वोइसनहे पाबे बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे लंद्फंदिहा लबरा झबरा के दिन थोरके होथे पिरकी घलव चकावर करके मुड़ धर के रोथे...
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एक दिन जाना हवय इंहा ले...
एक दिन जाना हवय इंहा ले सबला ओसरी पारी तन कैसे कब कहाँ ये ककरो हाथ नहीं संगवारी अजरा, जतखत, परे डरे कस का बिरथा जिनगानी खरतर, गुनवंता, धनवंत...
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संगी मन थोरुक बढे चलव गा
अब झन करव अबिरथा अबेर गा संगी मन थोरुक बढे चलव गा भाई मन चिटुक बढे चलव गा !! अतियाचार करिन बैरी जब तुम निचट देह डारेव ! सुमता छांड अपुस मा ...
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मोर कुंवर कन्हैया...!
जन्माष्टमी के पावन बेरा मा...परसतुत हे॥ श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें .... मोर ...
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अपन गोठ...
सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब म...
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