सह + मत

पडी लकीर रेत पर जैसी
आज हुई गति नैतिकता की
भीडतंत्र के संकल्‍पों में
डूब गई मति मानवता की.

 विद्या भूषण मिश्र
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संगी-साथी

ब्‍लॉगर संगी