'गुरतुर गोठ' www.gurturgoth.com हमार नवा ठीहा

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु



संजीव भैय्या के किरपा अ‍उ परयास के फ़लस्वरुप एक ठीन किताब हाथ लग गे हे नाम हाबे "तपत कुरु भई तपत कुरु " अ‍उ एखर लिखैय्या हाबे प्रसीद्ध प्रवचन कर्ता श्री दानेश्वर शर्मा जी एमा एक से एक मजेदार छ्त्तीसगढि गीत हाबे उही मे से एक ठिन ला ए मेर लिखत हाबो कबर कि जम्मो सुघ्घर चिज ला मिल बाँट के खाये के हमर छ्त्तीसगढि परंपरा हाबे ॥ त आवव पढव एक ठिन मजेदार गीत ......

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु
बोल रे मिट्ठु तपत कुरु
बडे बिहनिया तपत कुरु
सरी मँझनिया तपत कुरु
फ़ुले-फ़ुले चना सिरागे
बाँचे हावय ढुरु-ढुरु ॥

चुरी बाजय खनन-खनन
झुमका बाजय झनन-झनन
गजब कमैलिन छोटे पटेलीन
भाजी टोरय सनन-सनन
केंवची-केंवची पाँव मा टोंडा
पहिरे हावय गरु-गरु ॥

बरदि रेंगीस खार मा
महानदी के पार म
चारा चरथय पानी पीथँय
घर लहुँटय मुँदिहार म
भ‍इया बर भ‍उजी करेला
राँधे हावय करु-करु ॥

पानी गिरथय झिपिर-झिपिर
परछी चुहथय टिपिर-टिपिर
गुरमटिया सँग बुढिया बाँको
खेत मा बोलय लिबिर-लिबिर
ल‍इका मन सब पल्ला भागँय
डोकरी रेंगय हरु-हरु ॥

दीपक शर्मा
विप्लव

5 टिप्पणियाँ:

seema gupta August 21, 2008 9:42 AM  

त आवव पढव एक ठिन मजेदार गीत ......
चुरी बाजय खनन-खनन
झुमका बाजय झनन-झनन
गजब कमैलिन छोटे पटेलीन
भाजी टोरय सनन-सनन
केंवची-केंवची पाँव मा टोंडा
पहिरे हावय गरु-गरु ॥
"ha ha ha "तो आओ पढें एक मजेदार गीत, और गीत की बस यही पंक्तियाँ समझ मे आयी हैं, पर कोशिश करना अच्छा लगा"
Regards

anwar August 23, 2008 12:28 AM  

jai johaar ..abad mast likhe has bhai.

Yuvraj Gajpal August 23, 2008 9:52 AM  

ये गाना ल पढ़ॅ के "गोबर दे बछरू , गोबर दे चारो खुँट ल् लीपन दे के " सुरता आगे । दीपक भाइ ल बहुँत बहुँत साधुवाद

महेंद्र मिश्रा August 24, 2008 12:26 PM  

दीपक साधुवाद..

महेंद्र मिश्रा August 24, 2008 5:00 PM  

apki post padhakar bahutachcha laga .deepak ji ko rachana ke liye badhai.likhate rahiye.dhanyawad.

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आप मन हमर गुरतुर गोठ म आयेव येखर आप ला बहुत बहुत बधई । .............
खाल्‍हे म देहे डब्‍बा म अपन बिचार अउ सुझाव जरूर लिखहू ........

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