जिस तरह पत्र के लिए काम करना पत्रकारिता है तो विभिन्‍न पत्रिकाओं के लिए काम करने को पत्रिकाकारिता नहीं कहा जाना चाहिए?

जिस तरह पत्र के लिए काम करना पत्रकारिता है तो विभिन्‍न पत्रिकाओं के लिए काम करने को पत्रिकाकारिता नहीं कहा जाना चाहिए?

पराग, दिनमान और धर्मयुग जैसी लोकप्रिय रहीं पत्रिकाओं के संपादक रह चुके कन्हैया लाल नंदन के दुखद निधन पर उन पत्रिकाओं की बेवक्त की मौत भी याद...
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सिक्किम पर रे की फिल्म से 40 साल से लगी रोक हटी

सत्‍यजीत रे भले ही भारत के सबसे मशहूर फिल्मकारों में से एक हैं, लेकिन भारत सरकार ने सिक्किम पर उनकी बनाई हुई दस्तावेजी फिल्म 1971 में प्रतिब...
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आपका भी ब्लॉग प्रिंट मीडिया पर : एक अखबार की अपील

आपका भी ब्लॉग प्रिंट मीडिया पर : एक अखबार की अपील

अयोध्या विवाद पर 24 सितंबर को फैसला आनेवाला है, इस पर आप क्या सोचते हैं, इस मुद्दे पर हर पक्ष की ओर से हंगामा होता रहा है। कोर्ट का आदेश आने...
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एक नानवेज टाईप पोस्‍ट : क्षमा सहित.

एक नानवेज टाईप पोस्‍ट : क्षमा सहित.

लगभग पांच साल पहले मैं अपने एक होटल प्रबंधक मित्र के साथ मुम्‍बई गया था, हम दोनों को एक कम्‍पनी में काम था। मुझे एक संस्‍था के वाणिज्यिक परि...
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लिंक पे लिंक बनाते चलो ब्‍लॉग में ट्रैफिक बढ़ाते चलो

लिंक पे लिंक बनाते चलो ब्‍लॉग में ट्रैफिक बढ़ाते चलो

किसी ब्‍लॉग या वेब साईट में ट्रैफिक बढ़ाने के ट्रिक में सर्च इंजन आप्‍टमाईजेशन (सीओ) टूल के महत्‍व को तकनीकि विशेषज्ञ गाहे बगाहे बतलाते रहते...
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संगी-साथी