जिस तरह पत्र के लिए काम करना पत्रकारिता है तो विभिन्‍न पत्रिकाओं के लिए काम करने को पत्रिकाकारिता नहीं कहा जाना चाहिए?

पराग, दिनमान और धर्मयुग जैसी लोकप्रिय रहीं पत्रिकाओं के संपादक रह चुके कन्हैया लाल नंदन के दुखद निधन पर उन पत्रिकाओं की बेवक्त की मौत भी याद पड़ती है और पत्रिकाओं की पत्रकारिता करने वाले लोगों के लिए एक नया शब्द भी सूझ रहा है .... सामान्‍य बोलचाल की भाषा में पत्र-पत्रिका का मतलब (समाचार) पत्र और पत्रिका होता है तो समाचार पत्र के लिए काम करने वाले को पत्रकार कहने की तरह पत्रिका के लिए काम करने वाले को पत्रिकाकार नहीं कहा जाना चाहिए? .... और जिस तरह पत्र के लिए काम करना पत्रकारिता है तो विभिन्‍न पत्रिकाओं के लिए काम करने को पत्रिकाकारिता नहीं कहा जाना चाहिए?
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डॉ. निर्मल साहू, दैनिक छत्‍तीसगढ़, रायपुर.

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