गुडहल के फूलों से सजा मेरा आंगन


जासवंत, गुड़हल या जवाकुसुम वृक्षों के मालवेसी परिवार से संबंधित फूलों वाला पौधा है। इसका वनस्पतिक नाम है- हिबिसकस रोज़ा साइनेसिस। इस परिवार के अन्य सदस्यों में कोको, कपास, भिंडी और गोरक्षी आदि प्रमुख हैं। 

यह विश्व के समशीतोष्ण, उष्ण कटिबंधीय और अर्घ उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। गुडहल जाति के वृक्षों की लगभग 200-220 प्रजातियां पाई जाती हैं, साथ ही कुछ झाडिय़ां और छोटे वृक्ष भी इसी प्रजाति का हिस्सा हैं।

गुड़हल की दो विभिन्न प्रजातियां मलेशिया तथा दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय पुष्प के रूप में स्वीकार की गई हैं। गुड़हल की कुछ प्रजातियों को उनके सुन्‍दर  फूलों के लिये उगाया जाता है।

नीबू, पुदीने आदि की तरह गुड़हल की चाय भी सेहत के लिए अ‘छी मानी जाती है। गुड़हल की एक प्रजाति 'कनाफ’ का प्रयोग कागज बनाने में किया जाता है। एक अन्य प्रजाति 'रोज़ैल’ का प्रयोग प्रमुख रूप से कैरिबियाई देशों में सब्जी, चाय और जैम बनाने मे किया जाता है।
गुड़हल के फूलों को देवी और गणेश जी की पूजा मे अर्पित किया जाता है। गुड़हल के फूलों में, फफूंदनाशक, आर्तवजनक, त्वचा को मुलायम बनाने और प्रशीतक गुण भी पाए जाते हैं। कुछ कीट प्रजातियों के लार्वा इसका प्रयोग भोजन के रूप में करते हैं। दक्षि‡ण भारत के मूल निवासी गुड़हल के फूलों का इस्तेमाल बालों की देखभाल के लिये करते हैं।

बाल झडऩे और रूसी की समस्या से निपटने के लिय इसके फूलों और पत्तियों को पीस कर इसका लेप सर पर लगाया जाता है। इसका प्रयोग केश तेल बनाने मे भी किया जाता है। इस फूल को परंपरागत हवाई महिलाओं द्वारा कान के पीछे से टिका कर पहना जाता और इस संकेत का अर्थ होता है कि महिला विवाह हेतु उपलब्‍ध है।
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार सफेद गुड़हल की जड़ों को पीस कर कई दवाएं बनाई जाती हैं। मेक्सिको में गुडहल के सूखे फूलों को उबालकर बनाया गया पेय एगुआ डे जमाईका अपने रंग और तीखे स्वाद के लिये काफी लोकप्रिय है। अगर इसमें चीनी मिला दी जाय तो यह क्रैनबेरी के रस की तरह लगता है।

डायटिंग करने वाले या गुर्दे की समस्याओं से पीडि़त व्यक्ति अक्सर इसे बर्फ के साथ पर बिना चीनी मिलाए पीते हैं, क्योंकि इसमें प्राकृतिक मूत्रवर्धक गुण होते हैं।

ताइवान के चुंग शान मेडिकल यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि गुडहल के फूल का अर्क दिल के लिए उतना ही फायदेमंद है जितना रेड वाइन और चाय। इस फूल में एंटीऑक्सीमडेंट्स होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियं˜त्रित रखने में मददगार होते हैं। 
विज्ञानियों के मुताबिक चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि गुड़हल (हिबिस्कस) का अर्क कोलेस्ट्राल को कम करने में सहायक है इसलिए यह विश्‍वास किया जा रहा है कि मनुष्‍यों पर भी कारगर होगा।
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4 टिप्पणियाँ:

  1. वाह,
    सुन्दरता प्यारी सी,
    फूलों की क्यारी थी।

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  2. बड़ी सुन्दर बगिया मेरा मतलब बड़ा सुन्दर आंगन है आपका ! देखते हैं कि कब दर्शन होंगे...पर आपनें टाइम पास की बेला में अपनें दो और सुन्दर पुष्प पादपों का ज़िक्र ही नहीं किया :)

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  3. ... bahut sundar ... behatreen !!!

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  4. बहुत ही सुंदर.
    http://sudhirraghav.blogspot.com/

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