गुरतुर गोठ : छत्तीसगढी पाठक सुझाव देवें

गुरतुर गोठ : छत्तीसगढी पाठक सुझाव देवें

छत्‍तीसगढ हा राज बनगे अउ हमर भाखा ला घलव मान मिलगे संगे संग हमर राज सरकार ह हमर भाखा के बढोतरी खातिर राज भाखा आयोग बना के बइठा दिस अउ हमर भा...
Read More
संत कवि पवन दीवान की हस्‍तलिखित कविता

संत कवि पवन दीवान की हस्‍तलिखित कविता

भाई दीपक शर्मा जी हा पाछू महीना अपन गांव राजिम आये रहिस त छत्‍तीसगढ के जाने माने कवि संत पवन दीवान मेर आसिरबाद लेहे ल गे रिहिस । भाई के मया...
Read More

बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे

जइसन करम करबे फल वोइसनहे पाबे बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे लंद्फंदिहा लबरा झबरा के दिन थोरके होथे पिरकी घलव चकावर करके मुड़ ध...
Read More
फोकट के बिजली ल तोरे घर मे राख

फोकट के बिजली ल तोरे घर मे राख

छतीसगढ़ काँग्रेस के प्रभारी नारायण सामी के कहना हे कि अगर छतीसगढ मे काँग्रेस के शासन आही ते किसान मन ल फोकट मे बिजली दिही । हमन ह दिगविजय सिँ...
Read More
सारी

सारी

आजकल रोज सरी बिहनीया अ‍उ संझा दानेश्वर बबा के कविता ला पढत हव बने सुघ्घर लिखे हवय !! आज पढव उंकर एक ठीन रोमांटिक गीत अपन सारी बर ॥ मोर सारी...
Read More

मोर कुंवर कन्हैया...!

जन्माष्टमी के पावन बेरा मा...परसतुत हे॥ श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें .... ...
Read More
अपन गोठ...

अपन गोठ...

सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब म...
Read More

तपत कुरु भ‍इ तपत कुरु

संजीव भैय्या के किरपा अ‍उ परयास के फ़लस्वरुप एक ठीन किताब हाथ लग गे हे नाम हाबे "तपत कुरु भई तपत कुरु " अ‍उ एखर लिखैय्या हाबे प्र...
Read More

मुक्तक..

मुक्तक.. पर के पीरा हा जेकर हिरदे मा जनावत हे पर के पीरा ल जौन अपन कस बनावत हे ! ऐसनहा मनखे, मनुख नोहय देवता ये पर के पीरा हरत जौन जनम प...
Read More

साखी....

साखी .... एक झन के जन्माये एक अँगना मा खेलेन बाढें ! हिन्दू सिख ईसाई मुल्ला फेर कैसे बन ठादें !! जनधन पाके अतियाँवय अउ पद पाके गरुवाय...
Read More

नयना नीर भरे

नयना नीर भरे कोई फिर ना झरे नाही कोई किसी को छले आओ सबसे से मिले गले..... इस चमन में अमन की वो गंगा बहे जन गण सदियों सलामत औ चंगा रहे धरा ध...
Read More

छत्तीसगढ़-गौरव

हमर देस ये हमर देस छत्तीसगढ़ आगू रहिस जगत सिरमौर। दक्खिन कौसल नांव रहिस है मुलुक मुलुक मां सोर। रामचंद सीता अउ लछिमन, पिता हुकुम से बिहर...
Read More

दमांद बाबू दुलरू

एक गांव मा एक बनिया रहत रहिस । ओखर मन करिस त वो ह परदेस कमाय बर निकल गिस । दूसर देश म जाके बनिया ह गजबेच्चओ धन कमाईस । फेर धन के भोरहा म वो...
Read More
धर ले कुदारी

धर ले कुदारी

धर ले रे कुदारी गा किसान आज डिपरा ला रखन के डबरा पाट देबो रे । ऊंच-नीच के भेद ला मिटाएच्च बर परही चलौ चली बड़े बड़े ओदराबोन खरही झुर...
Read More
मोर भाखा

मोर भाखा

मोर भाखा सँग दया मया के सुग्घर हवै मिलाप रे । अइसन छत्तीसगढ़िया भाखा, कऊनो सँग झन नाप रे ।। येमा छइहाँ बम्हलई देबी, बानबरद गोर्रइयाँ के ...
Read More

जागरण गीत

भाई समीर यादव जी ह हमर धरती के मया म सुकवि बुधराम यादवजी के ये जागरन गीत गुरतुर गोठ के संगी मन बर भेजे हे । जागौ किसान जागौ जवान हमर छत्‍ती...
Read More

महर महर महकय माटी

............ महर महर महकय माटी......... महर महर महकय माटी मोर लहर लहर लहरावय धान ! खेत मेढ़ मा ठाढे मगन मन मुचुर मुचुर मुसकावय किसान ...
Read More

संगी-साथी