'गुरतुर गोठ' www.gurturgoth.com हमार नवा ठीहा

बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे





जइसन करम करबे फल वोइसनहे पाबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



लंद्फंदिहा लबरा झबरा के दिन थोरके होथे
पिरकी घलव चकावर करके मुड़ धर के रोथे
रेंगे रद्दा नरक के कैसे सरग हबराबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



दूसर बर खंचवा कोडवैया अपने गिर मरथे
चुरवा भर मा बुड्वैया ला कौन भला तिरथे
असल नक़ल सब परखत हे अउ कत्तेक भरमाबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



जनधन पद अउ मान बडाई पाके झन गरुवा
साधू कस परमारथ करके पोनी कस हरुआ
बर पीपर बन खड़े खजूर कस कब तक इतराबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



अंतस कलपाये ले ककरो पाप जबर परथे
हिन् दुबर दुखिया के सिरतो सांस अगिन झरथे
छानी ऊपर होरा झन भूंज जर बर खप जाबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



सब दिन सावन नई होवे नई होय रोज देवारी
सब दिन लांघन नई सोवे नई खावे रोज सोहारी
का सबर दिन रहिबे हरियर कभू तो अयिलाबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



सौंपत मा झूमे रहिथे बिपत मा दुरिहाथे
जियत कहिथे मोर मोर मरे मा तिरयाथे
ये दुनिया के रित एही काखर बर खिसियाबे
बोके बमुरी तैं चतुरा आमा कैसे खाबे



रचयिता
सुकवि बुधराम यादव
बिलासपुर

2 टिप्पणियाँ:

seema gupta September 9, 2008 11:23 AM  

"jaise karam krega vaisa fal milega, bair boke aam kaise khayega" shee kha na.... bhut accha lga, thoda thoda smej aane lga hai ab"

Regards

Raviratlami September 9, 2008 1:55 PM  

अच्छा लगीस गा. राउत नाचा में बोले जाए दोहा मन ल घलोक कभी इहाँ छापहू.

Post a Comment

आप मन हमर गुरतुर गोठ म आयेव येखर आप ला बहुत बहुत बधई । .............
खाल्‍हे म देहे डब्‍बा म अपन बिचार अउ सुझाव जरूर लिखहू ........

Custom Search

मोर सोंच मोर छत्तीसगढी

मोर मन हा छत्तीसगढी बोले पढे लिखे म अडबड गदगद होथे, काबर नई जानव ? फ़ेर सोचथो मोर जनम इहि छत्तिसगढ के कोरा मा होये हवय गाव, गौठन, गाडा रावन के धुर्रा संग खेलत औउ ब्यारा के पैरा मा उलानबादी खेलत लईकई बिते हे सुआ ददरिया फ़ाग अउ माता सेवा गात नाचा गम्मत खेलत पढई के दिन बिते हे तेखरे सेती मोर छत्तिसगढ अंतस ले कुहुक मारथे । आघू अउ हे ......

अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया कि सुनव सासे बिनती हमार

मोला आज्ञा देतेव सास

कि जातेंव सगरी नहाय

घर हिन कुंवना घर हिन बावली

कि घर हिन करौ असनाद, पूरा गाथा पढौ ........

पागा फोटू बडे भाई अनूप रंजन पाण्डेय के 'बस्तर बैंड'

  © Blogger template 'External' by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP