मानव 2

अपने भीतर के कल्‍मष को
अब तक मनुज नहीं धो पाया
अपने व्‍यवहारों को उसने
नया मुखौटा है पहनाया
पाषाणी मानव के भीतर,
अपनापन कुंटित प्रतिपल है.

विद्या भूषण मिश्र 
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