'गुरतुर गोठ' www.gurturgoth.com हमार नवा ठीहा

संत कवि पवन दीवान की हस्‍तलिखित कविता

भाई दीपक शर्मा जी हा पाछू महीना अपन गांव राजिम आये रहिस त छत्‍तीसगढ के जाने माने कवि संत पवन दीवान मेर आसिरबाद लेहे ल गे रिहिस । भाई के मया अउ परेम म संत कवि पवन दीवान जी हा तुरते अपन हाथ ले एकठन कबिता लिख के गुरतुर गोठ के असिरबाद बर दीस । ये कबिता ला हम आपमन के खातिर इंहा परस्‍तुत करत हन ।

दीपक भाई के बिदेस म रहि के देस के, माटी के मया अउ इज्‍जत ल हमर सलाम ।

Kavita

5 टिप्पणियाँ:

Anil Pusadkar September 17, 2008 2:05 PM  

दीवान जी महराज ला औ दीपक महराज गाडा गाडा बधाइ

seema gupta September 17, 2008 2:39 PM  

" really appreciating efforts to make availabe hand written poetry by Sant pawan jee. thanks deepak jee"

Regards

दीपक September 17, 2008 3:31 PM  

ए आशा त बांधे जा सकत हे के गुरतुर गोठ छ्त्तीसगढ अ‍उ छ्त्तीसगढी के परती अपन जिम्मेदारी ला पुरा कर अपन दमदारी के साथ अपन अस्तित्व ला प्रगट करही !!

sameer yadav September 18, 2008 12:04 AM  

गुरतुर गोठ के बाना धरैया मन ला एखर खातिर
खूब जतन करे ला परही...ए रचना संग्रहण बर ..साधुवाद..!
.अउ मिहनत बर ...शुभकामना कहिलव.

Sanjeet Tripathi September 18, 2008 2:06 AM  

वाह ये तो सुघ्घर हावय गा।

Post a Comment

आप मन हमर गुरतुर गोठ म आयेव येखर आप ला बहुत बहुत बधई । .............
खाल्‍हे म देहे डब्‍बा म अपन बिचार अउ सुझाव जरूर लिखहू ........

Custom Search

मोर सोंच मोर छत्तीसगढी

मोर मन हा छत्तीसगढी बोले पढे लिखे म अडबड गदगद होथे, काबर नई जानव ? फ़ेर सोचथो मोर जनम इहि छत्तिसगढ के कोरा मा होये हवय गाव, गौठन, गाडा रावन के धुर्रा संग खेलत औउ ब्यारा के पैरा मा उलानबादी खेलत लईकई बिते हे सुआ ददरिया फ़ाग अउ माता सेवा गात नाचा गम्मत खेलत पढई के दिन बिते हे तेखरे सेती मोर छत्तिसगढ अंतस ले कुहुक मारथे । आघू अउ हे ......

अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया कि सुनव सासे बिनती हमार

मोला आज्ञा देतेव सास

कि जातेंव सगरी नहाय

घर हिन कुंवना घर हिन बावली

कि घर हिन करौ असनाद, पूरा गाथा पढौ ........

पागा फोटू बडे भाई अनूप रंजन पाण्डेय के 'बस्तर बैंड'

  © Blogger template 'External' by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP