संत कवि पवन दीवान की हस्‍तलिखित कविता

भाई दीपक शर्मा जी हा पाछू महीना अपन गांव राजिम आये रहिस त छत्‍तीसगढ के जाने माने कवि संत पवन दीवान मेर आसिरबाद लेहे ल गे रिहिस । भाई के मया अउ परेम म संत कवि पवन दीवान जी हा तुरते अपन हाथ ले एकठन कबिता लिख के गुरतुर गोठ के असिरबाद बर दीस । ये कबिता ला हम आपमन के खातिर इंहा परस्‍तुत करत हन ।

दीपक भाई के बिदेस म रहि के देस के, माटी के मया अउ इज्‍जत ल हमर सलाम ।

Kavita

6 comments:

  1. दीवान जी महराज ला औ दीपक महराज गाडा गाडा बधाइ

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  2. " really appreciating efforts to make availabe hand written poetry by Sant pawan jee. thanks deepak jee"

    Regards

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  3. ए आशा त बांधे जा सकत हे के गुरतुर गोठ छ्त्तीसगढ अ‍उ छ्त्तीसगढी के परती अपन जिम्मेदारी ला पुरा कर अपन दमदारी के साथ अपन अस्तित्व ला प्रगट करही !!

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  4. गुरतुर गोठ के बाना धरैया मन ला एखर खातिर
    खूब जतन करे ला परही...ए रचना संग्रहण बर ..साधुवाद..!
    .अउ मिहनत बर ...शुभकामना कहिलव.

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  5. वाह ये तो सुघ्घर हावय गा।

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  6. दीवान जी ने तो इसे एक चित्र गीत जैसा लिखा है अपन बचपना के दिन में पहुँच गे रहव

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