दमांद बाबू दुलरू

एक गांव मा एक बनिया रहत रहिस । ओखर मन करिस त वो ह परदेस कमाय बर निकल गिस ।
दूसर देश म जाके बनिया ह गजबेच्चओ धन कमाईस । फेर धन के भोरहा म वो ह अपन नोनी बाबू ल नई भुलाईस । बनिया ह अपन कमई के जन दोगानी मोटरिया के अपन गांव लहुटे बर तियार होगे । फेर वो ह मने मन गुनिस के घर अमरे के पहिली चिठी डार दौं त घर मा परवार के जम्मो झिन सकला जाहीं । अईसे गुन के बनिया ह गांव बर चिठी लिख के डार दिस अउ अपन मोटरी मोटरा ल धर के गांव बर लिकल गे ।

एक पाख बनिया ल गांव आये मा लगगे अउ ऐती बनिया के दमांद जउन ह अपन ससरार के रखवार बनके राहत रहय जेन ल बनिया के भेजे चिट्ठी ल हरकारा ल देईस ।

दुलरू दमांद ह वो चिठी ला धर के दुआरी के चउरा मा बईठ के गोहार पार पार के रोवन लागिस । वौखर रोवइ ल सुनके ओखर घर गोसइन ह उत्ता धुर्रा आईस अउ अपन मनखे के हाथ मा कारड ल देखते अपन मनसे ल पोटार के वोखरो ले जोरहा रोवन लागिस ।

इनकर रोवई ल सुनके बनिया के घरवाली घला अपन बेटी दमांद ल पोटार के अपनों रोय लगिस ।

इखर रोवई के आरो पारा परोसी मन ल मिलिस त जम्मो सकलागें । एती बनिया ह घलो अपन घर पहुचिस त अपन दुवारी म जम्मो गांव माई पिल्लां ल देख के कुछु गुने नई सकिस अउ उहू हा बेटी दमांद अउ अपन घरवाली के तीर म बइठ के रोवन लागिस ।

फेर गजब्बे बेरा के रोवई उप्पर बनिया ह अपन घरवाली ले कलु चुप पूछिस, का होगे ओ, हमर उपर काय दुख परे हे ?

बनिया के घरवाली जेखर रोवई म आंखी ह भजिया असन फूलगे रहय, किहिस – में नई जानव ! वो ह अपन बेटी ल पूछिस त उहू किहिस – में नई जानव ! बनिया के बेटी ह अपन मनसे ले पूछिस त अपन हाथ के चिठी ल दे देइस ।

जब बनिया ह देखिस त ए उही कारड रहय जेला वो ह परदेस ले भेजे रहिस । वो ह अपन दुलरू दमांद ले पूछिस, कसरे बाबू एमा काय लिखे हे जउन ला पढ के तैं जम्मो गांव घर मा रोवई के ओरा बहादेस ।

दमांद बाबू ह किहिस, मे ह अपन करनी के दुख म रोवत रेहेंव । पढे लिखे के दिन मां पढेव निही । जम्मो घर के मन पढे बर जोजियांवय फेर में ह गुल्ली डंडा, डंडा पचरंगा खेल के गंवा देंव । आज जब हरकारा कका ह मोला चिठी देके गिस त में एला पढे नइ सकव कहिके रो डारेंव ।

बनिया अउ गांव के जम्मो रहवइया मन ए दुलरू दमांद के गोठ ल सुनके हांसिन फेर यहू गुनिन के गांव मा हमन कोनो ल अपढ अडनिया नई रहन देवन ।




शिव शंकर शुक्ल

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