'गुरतुर गोठ' www.gurturgoth.com हमार नवा ठीहा

महर महर महकय माटी



............महर महर महकय माटी.........


महर महर महकय माटी मोर लहर लहर लहरावय धान !

खेत मेढ़ मा ठाढे मगन मन मुचुर मुचुर मुसकावय किसान !!
जुरमिल बेटा-बहु सुवारिन

खेत के बन-कचरा निरवारिन !

जईसे जिनगी के गुन अवगुन

निरवारय कोई चतुर सुजान !!

महर महर महकय माटी मोर,
लहर लहर लहरावय धान !
झिमिर झिमिर बादर बरसय

धरती के चारों खुंट सरसयं !

सुध बुध बिसरे बांचय दादुर

जस के जानव पोथी पुरान !!

महर महर महकय माटी मोर,
लहर लहर लहरावय धान !
सुरूर सुरूर पुरवैया डोले

खर खर धान के पाना बोलय !

चिरईं चुरगुन जमो खार के

जुरमिल जनव मिलांवय तान !!

महर महर महकय माटी मोर,
लहर लहर लहरावय धान !
मेहनत के फल समुनहे पाके

तन मन के सब दुःख बिसराके !

चोंगी मा माखुर भर आगी

चकमक मा सुलगावय मितान !!

महर महर महकय माटी मोर,
लहर लहर लहरावय धान !
कनिहा मा ओठ्गाये तुतारी

धरे खांध मा रांपा कुदारी !

अलबेला अलखावत गावय

मोर धरती मोर जीव परान !!

महर महर महकय माटी मोर,
लहर लहर लहरावय धान !
महर महर महकय माटी मोर लहर लहर लहरावय धान !

खेत मेढ़ मा ठाढे मगन मन मुचुर मुचुर मुसकावय किसान !!


..................
रचयिता..

......
सुकवि बुधराम यादव..

..........
बिलासपुर..
#

....................... परिचय...............



......................बुधराम यादव ............



पिता का नाम - श्री भोंदू राम यादव



पत्नी - श्रीमती कमला देवी यादव



जन्मतिथि - 3 मई 1946



पता - ग्राम खैरवार (खुर्द) तहसील-लोरमी, जिला-बिलासपुर, छत्तीसगढ़.



शैक्षणिक योग्यता - सिविल इंजीनियरिंग में पत्रोपाधि अभियंता



साहित्यिक अभिरुचि - गीत एवम कविता लेखन छत्‍तीसगढी एवम हिंदी में, सतसाहित्य अध्ययन चिंतन और गायन



कृतियाँ - काव्य संग्रह " अंचरा के मया " छत्‍तीसगढी गीत एवम कविता संग्रह प्रकाशित



प्रकाशन एवम प्रसारण - वर्ष 1966-67 से प्रयास प्रकाशन बिलासपुर से प्रकाशित काव्य संग्रह 'खौलता खून', मैं भारत हूँ, नए गीत थिरकते बोल, सुघ्घर गीत एवम भोजली आदि में रचनाएँ प्रकाशित हुई . इनके अतिरिक्त अन्य आंचलिक पत्र पत्रिकाओ एवम काव्य संग्रहों में भी रचनाओं का प्रकाशन होता रहा है. आकाशवाणी तथा गोष्ठी एवम कवि सम्मेलनों के माध्यम से भी निरंतर साहित्य साधना करते रहें हैं.



सम्प्रति - अभियंता के पद पर विभिन्न स्थानों में शासकीय सेवा करते हुए साहित्य साधना में सक्रिय रहे, वर्तमान में पद से सेवानिवृत होकर बिलासपुर में सक्रिय.



वर्तमान पता - एम.आई.जी. /8 चंदेला नगर रिंग रोड क्र. बिलासपुर, छत्तीसगढ़

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

आप मन हमर गुरतुर गोठ म आयेव येखर आप ला बहुत बहुत बधई । .............
खाल्‍हे म देहे डब्‍बा म अपन बिचार अउ सुझाव जरूर लिखहू ........

Custom Search

मोर सोंच मोर छत्तीसगढी

मोर मन हा छत्तीसगढी बोले पढे लिखे म अडबड गदगद होथे, काबर नई जानव ? फ़ेर सोचथो मोर जनम इहि छत्तिसगढ के कोरा मा होये हवय गाव, गौठन, गाडा रावन के धुर्रा संग खेलत औउ ब्यारा के पैरा मा उलानबादी खेलत लईकई बिते हे सुआ ददरिया फ़ाग अउ माता सेवा गात नाचा गम्मत खेलत पढई के दिन बिते हे तेखरे सेती मोर छत्तिसगढ अंतस ले कुहुक मारथे । आघू अउ हे ......

अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया कि सुनव सासे बिनती हमार

मोला आज्ञा देतेव सास

कि जातेंव सगरी नहाय

घर हिन कुंवना घर हिन बावली

कि घर हिन करौ असनाद, पूरा गाथा पढौ ........

पागा फोटू बडे भाई अनूप रंजन पाण्डेय के 'बस्तर बैंड'

  © Blogger template 'External' by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP