'गुरतुर गोठ' www.gurturgoth.com हमार नवा ठीहा

अपन गोठ...

सुकवि बुधराम यादव जी के रचित थोरकुन गीत, कविता, जागरण गीत , मुक्तक , साखी के गुरतुर-गोठ अउ मनोरथ के माध्यम से आप मन अवलोकन करेव । ये सब मोर तीर जौन आदरणीय के जुनाहा संग्रह रहिस ओखरे खजाना आए। ...उनकर गीत/रचना प्रसतुत करईया तो मे हवव , पर आपोमन ला ऐसे लगत होही के उनकर रचना बर आपमन के जौन प्रतिक्रिया बिचार मिलथे ,तेखर बर आदरणीय बुधराम जी के का सोचना हवे..... ता मे उंखरे खजाना - संग्रह म ले एक उंखर लेख इन्हा पोस्ट करत हंव ....... आर्शीवाद देहव

अपन गोठ...

मिरगा कस बिरथा तिसना पाले जनव उचाट मारत जिनगी हा तीसर पहर म कब हबर गय पता नई लगिस , पीछू डहर झाँके ले बहुत पहाये अउ थोरे बचाए के मरम हा सालथे , जीव ला कचोटथे अउ सुरता आथे नीत के ओ गोठ जौन माता-पिता , गुरुजन अऊ बड़का सियान मन ले सुने रहेन अऊ जेकर परभाव हा आज घलव संकलप के रूप म हावय के .......

सेवा म अरपन कर सगरी -अपन हित बिसराके
करज चुका ले महतारी के मनुख तन ये पाके

सोरह आना सच आय के ----- आये हें सो जाये बर राजा रंक फ़कीर जमो निचट जुच्छा हाथ , जत्तेक इंहा पाये , कमाए हें इहें गवाएं परही।


" अंचरा के मया " जनम देवैया महतारी अउ कोरा म बसर देवैया धरती महतारी दुनो के मया के बखान अउ महिमा गान करे के लइकानी जतन आय , जौन हां ये माटी के दुलौरा जमो मनखे तक कुछ आखर मा पहुचाये ले बिस्वास हे जरुर सनेह अउ दुलार के भागी बनही


ये गीत अऊ कविता मन ला एक संग्रह के सकल देवाय म मोर हित-मित साहित्यकार मन के संगी धुरंधर साहित्यकार अउ प्रयास प्रकाशन के निदेशक डॉक्टर विनय पाठक के गजब आभारी हँव ।

परम आदरणीय पंडित राजेंद्र प्रसाद शुक्ला , डॉक्टर पालेश्वर प्रसाद शर्मा जइसन प्रतिष्ठित अउ वरिष्ठ मनीषी मन के दू आखर आसिरवचन अउ सनेह के खातिर बहुते आभारी हंव ।

भाई कृष्ण कुमार भट्ट 'पथिक ' , डॉक्टर अजीज रफीक अउ सनत तिवारी घलव ला धन्यवाद ।

गीत - कविता के ये संग्रह मोर पूजनीया महतारी अउ पिता ला परम श्रद्धा सहित समर्पित हवय। जिनकर असीरवाद के आन्छत अपन भाखा के सेवा मा ये अरपन होए पावत हे ।

1966-67 ले प्रयास प्रकाशन ले जुरे साहत्या यात्रा म , बिसरत , भुलावत , रेंगत , सुस्तावत बरस 2001 मा बिलासा कला मंच के छैन्हा मा घाम घाले बर पहली ठीहा पाईस ।

आख़िर मा ये माटी के जमो गुनिजन , मुनिजन , सुधिजन , गुरुजन अउ बुधजन मन ले निवेदन हवय के येला पढ़के , सुन के , देख के एकर बने अउ घिनहा ला पोगरी झन पचोंहय। अपन सनेह संग सुघर सुझाव अउ आसिरवाद ला बिना अबेर करे मोर कटी भेजे बर झन भुलाहन्य ।

तुंहर सनेह अऊ दुलार के अगोरा मा.......
पता...
बुधराम यादव
एम.आई.जी.ए/8
चंदेला नगर
रिंग रोड नं. 2
बिलासपुर छत्तीसगढ़

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आप मन हमर गुरतुर गोठ म आयेव येखर आप ला बहुत बहुत बधई । .............
खाल्‍हे म देहे डब्‍बा म अपन बिचार अउ सुझाव जरूर लिखहू ........

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मोर सोंच मोर छत्तीसगढी

मोर मन हा छत्तीसगढी बोले पढे लिखे म अडबड गदगद होथे, काबर नई जानव ? फ़ेर सोचथो मोर जनम इहि छत्तिसगढ के कोरा मा होये हवय गाव, गौठन, गाडा रावन के धुर्रा संग खेलत औउ ब्यारा के पैरा मा उलानबादी खेलत लईकई बिते हे सुआ ददरिया फ़ाग अउ माता सेवा गात नाचा गम्मत खेलत पढई के दिन बिते हे तेखरे सेती मोर छत्तिसगढ अंतस ले कुहुक मारथे । आघू अउ हे ......

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