अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा

सासे के बोलेंव सास डोकरिया

कि सुनव सासे बिनती हमार

मोला आज्ञा देतेव सास

कि जातेंव सगरी नहाय

घर हिन कुंवना घर हिन बावली

कि घर हिन करौ असनाद,

अहिमन झन जा सगरी नहाय,

बेटा जान सुन पाहय त

पुरजा में खाल निकाल दे है

तभो ले सास के भाखा नई मानिस

कि अपन संगी बलाय

कुम्‍हरा के बोलेंव भईया कुम्‍हरा मोरे

कि चउदा ठन घईला गढ दे

सोनरा के बोलेंव सुनरा मोर भईया

कि घईला मोर बर गढ दे

सात चेरिया आगू अउ सात चेरिया पाछू

कि मांझ में अहिमन कैना

एक कोस गईस दुसरा कोस गईस

कि तिसर कोस म सगरी पार

सबो झन उतारें माटी के घईला

एक चेरिया रहिही देखन बर

कि सब गिंजर गिंजर फुलवा देखयं

देखी देखा कि भयेन तियार

कि कंच कपूर के दतवन टोरेन

दतुवन तोर तुरा के भयेन तियार

कि गईन सगरी के पार

चंदा सुरूज के दूई ठन पथरा

कि ओही म बईठ के दतुअन करिन

डुबकि डुबकि होईन तियार

कि सब सखि होगे तियारे

घईला गुडरिया ला बोहिन चेरिया मन

कि अहिमन खोजय अपन घईला

मोर घईला जा राखे बर केहेंव

कि कहां करे मोर घईला

चेरिया ला बोलेंव मोर चेरिया बहिनिया

कि मोर घईला कहां गये

गिंजर गिंजर खोजय घईला ल

कि नई पांवय घईला के पार

कि सगरी पार म बेपारी आये

कि घईला ला ओही ले जाय

अहिमन बोलय बेपारी मोर भईया

कि घईला ला दे दो हमार

बेपारी कहे घईला देहे ल देंहंव

कि पासा पाली तें ह खेल

भिर के कछोरा अहिमन बईठय

कि पासा पारी ढारै

सब गहना ला जीतय अहिमन

कि अपन गहना ला हारय

जाथन घर अपन

कि सासे ससुर गारी देय

कहां हे कईना तोर सासे ससुरार

कि कहां हे मईके तुहांर

मईके हमर दुरूग राज म हे

कि उंहां के राजा हमर भाई

उंहां के राजा मोर महापरसाद ये रे

कि बहिनी लागो हमार

अतका बचन ला जब सुनय

कि उठ के मिलना लागय

जुन्‍ना जुन्‍ना गहना ला उतार दे बहिनी

कि नवा नवा ल पहिर

बांस पोर लुगरा ला पहिर लेबे

कि ले जाबे घर तुहांर

बांस पोर के लुगरा ल नई पहिनव

कि हो जाही जिवरा के काल

सब बोहे माटी के घईला

कि अहिमन बोहे सोन कर घईला

सात चेरिया आघू चलय

सात चेरिया पाछू

कि बीच में अहिमन कईना

अहिमन कईना अपन घ जाय

कि कचेरी ले देखय बीरसिंग राजा

घईला गोडरिया घनौची मढाय

कि अहिमन कईना आय

दाई के बोले दाई तुम्‍हारे

कि बांस पोर लुगरा कहां के आय

बैरिन बरजेंव बहुरिया हमारे

कि बरजे बोली नई माने

बांस पोर के लुगरा ला बेटा पूछत हे

कि अहिमन ये लुगरा कहां के आय

तोर बहू ला कहि दे दाई

कि ओखर मईके जाबो

बर बिहाव होतिस दाई

कि तब दूनों झन जातेन

कि अहिमन कईना मोटरी ला धर के रेंगय

आगे आगे अहिमन कईना चलय

गांवें ला बहिरावै कईना अउ राजा

कि झपट के चूंदी ला राजा ह घरय

घेडा के पूछी म बेनी ला बांधय

कि उटभट में घोडा ला कुदाय

अहिमन कईना अल्‍लर भईगे

भर्री म जावय बीरसिंह राजा

कि घोरा के पूछी ला छोरय

हेरि के हिथयार दूई भाग करय

कि दूई भाग कर के घर में लहुटै

कि हंथियार ल दूवारी म मढाय

जेला ओ देखय ओखर डोकरी दाई

कि सूना म हथियार

करम छाड दिस जुग अब बूड गे

कि बहू ल मार के घर आय

येती के बात मोला अतका राहाय

कि ओती ले आवय बेपारी

बेपारी के बरदी के बरदी बईला हा आगे

कि ओही मेर खडा होवय

ओतके भर मा बईला नई रेंगय

कि बेपारी ह असकट होगे

जावंव तो देखंव बईला के आघू म

आघू म तो का हावय

बेपारी भईया जा के देखय

कि अहिमन ला मार डारे हावय

कि बेपारी रोवन लागय

बरदी के बरदी बईला खडे रहाय

कि नई चरे चारा नई पिये पानी

नई पागुर भांजय बईला तो येदे

कि का कारन येदे आय

भगवान के आसन डोलन लागय

कि कोन जोगी के जोग खराय

मोर तो आसन नई बांचय

कि डगमग डगमग करय बैकुंठ

जावव महादेव पारबती

कि देस के चिंता देख आहव

काखर बेबसता आय

महादेव पारबती उतरन लागय

बईले करा खडा होवय महादेव

बेपारी आगे गिर गे सरन में

कि सुन ददा हमर बात

मोर बहिनी ला कोन मारे हे

मोर बहिनी ला देबे जियाय

आघू बईला ला तय लाई लेबे

कि साते अक कपडा के देबे ओलार

मूडी अउ घर ला एके में जोरय

कि बेद ला देवय छुवाय

अमरित पानी ला मुख म डारय

कि अहिमन राम राम कहि के उठ गये

देखव तो देखव बहिनी पाछू डहर ला

जेला देखे बर सबो तो धरय

महादेव अछप हो गे भईया

लोटा में धर के जब घन पानी

कि सबो बईला के चरन पखारय

बरदी ला लेवय अब वो उठाय

कि ओही गांव म बरदी ला लेगय

पटपर मा तंबू ला तानय

कि जेंवन पानी उहें बनाय

अहिमन रानी सोंने के दंउरी म

कि गहूं ला हेरिन धराय

गहूं ला धर के बस्‍ती मा जावय

जांता मागें ला जाय

अहिमन कईना उहें गये रे

जहां लग ओखर ससुरार

कि देबे मां जांता तुम्‍हार

बेटा सुते हे बीरसिंग राजा

कि ओखर खटिया ला देबे घुचाय

खटिया ला टार के जांता ला बाहरय

कि गहूं ला देवय मढाय

डोकरी संग गहूं पीसन लागय

मोरे बहू तोरे सहि राहाय ओ

तो तोर बहू कहां गे हे दाई

कउन कारन घर नई रहिस

का दुख ला में गोटियांव

बहू के निकरे ले रब धन चल दिस

सुन गुन अहिमन मने मन हांसय

पिसी पिसा के हो गे तियार

कि आधा ला देवय अउ आधा ल लेवय

तहूं त दाई मोर खा लेबे रोटी

अहिमन कईना अपन तंबू म जाय

अईसे अईसे अठवाही होगे

झेंझरी ले देखय बीरसिंह राजा

बल कर तंबू म जाय

जेला देखय भाई बेपारी

मन हर लग गे बीरसिंह राजा के

कि बेपारी ला जा के बोलय

सुन ले बेपारी मोर बात

कि तोर बहिनी ला मोर बर बिहा दे

पईसा अउ कउछी जतका लेबे देहौं

कि तोर बहिनी ला देबे बिहाय

बेपारी एक दिन सुनय दुसर दिन सुनय

कि तोर आंखी नई दिखय

अपन गुइंया ला तय नई चिंनहय

कि आंखी ला का हो गे राजा तुहांर

अब बेपारी बहिनी ला देवय पठाय

कि जावव अपन घर दुवारे

बने खाबे नोनी बने कमाबे

राजे करव मन लगाय

कि सउप के बहिनिया बेपारी

अपन तंबू ला लागय उठाय

सिमगा के तीरे के गावें खम्‍हरिया भईया

के सेउक निसाद मोर नाव

अहिमन कईना के गीते ला भाई तुहंर बर मैं ह सुनाव ।


संकलन - संजीव तिवारी
Share on Google Plus

About Sanjeeva Tiwari

3 टिप्पणियाँ:

  1. पहिली घाव मेहा अहिमन कैना के किस्सा ला सुने हव मजा आईस हे संजीव भैय्या !! कभु लोरिक चंदा के किस्सा ला घलो सुनाहु पाड्कास्ट होही ता अ‍उ मजा आ जाही

    ReplyDelete
  2. अच्छा लगा पढ़ कर

    ReplyDelete
  3. अच्छा लगा पढ़ कर

    ReplyDelete

.............

संगी-साथी