लाला जगदलपुरी के कबिता

जब ले तैं सपना से आये
मोला कुछु सुहावत नइये
संगी तैं ह अतेक सुहाये
पुन्नी चंदा ल देखेंव
तोरे मुह अस गोल गढन हे
अंधियारी म तारा देखेंव
माला के मोती अस तन हे
तोर सुगंध रातरानी हर
भेजत रहिथे संग पवन के
नींद भरे रहिथे आंखीं में
दुख बिसराथंव जनम मरन के ।

लाला जगदलपुरी
Share on Google Plus

About Sanjeeva Tiwari

0 टिप्पणियाँ:

Post a Comment

.............

संगी-साथी