बधाई देंवें यह पोस्ट हमारी 68 वीं पोस्ट है ......

पिछले पोस्ट में राजकुमार ग्वालानी जी के पोस्ट में आई टिप्पणी को प्रकाशित करने के बाद ब्लागवाणी में हाट लिस्ट के तीसरे क्रम में अपने 'घुरूवे' को पाकर मुझे ब्रह्मज्ञान हुआ कि मेरे जैसे ब्लॉगर के लिये एलीट टाईप पोस्ट एवं टिप्पणी व्यवहार करना अच्छा है. सो हम सोंचने लगे कि अपनी ब्लॉग सक्रियता बढाने और चिट्ठाजगत सक्रियता संख्या कम करने के लिए रोज कुछ ना कुछ पोस्ट करना अत्यंत आवश्यक है. यदि पोस्ट में एकाध दिन चूक हुई तो बडा भारी संकट आ जावेगा, हो सकता है कि हमारी सक्रियता संख्या विरोधी दल भाजपा वाले कम कर दें. ऐसे में तो हमारे एलीट ब्लॉगर कहलाने की सारी कोशिशे धरी की धरी रह जावेगी.

इसलिए आज भी कुछ लिख ही दें. पर शीर्षक क्या दें ........ ? .... मठाधीशो को चुनौती ......, बधाई देंवें यह पोस्ट हमारी 68 वीं पोस्ट है ......हॉं यह ठीक है.

साथियों इस ब्लॉग से ब्लॉगिंग करते हुए हमें अभी दो साल हो गए हैं और हमने इस बीच 67 पोस्ट लिखें हैं. हॉंलाकि हमने इस ब्लॉग को संकलको मे पजीकृत एक दो दिन पहले ही करवाया है, इसके पहले यह ब्लॉग सर्च इंजन के सहारे पाठको के बीच जा रही थी. फिर भी हमने लिखना नहीं छोडा था, अजी हां.... दूसरों का लिखा को यहां पब्लिश करना. वैसे भी हम अपने किसी भी ब्लॉग में स्वयं ज्यादा नहीं लिखते दूसरे लोगों का लिखा ही पब्लिश कर देते हैं. अरे भई अपना लिखा चिपकाओ कि दूसरों का लिखा चिपकाओ कहलायेंगें तो ब्लॉगर ही ना. तो साथियों विषय से विषयांतर ना होते हुए हम बता रहे थे कि इतने कम समय में हमारे चिट्ठाजगत सक्रियता की संख्या है 1931 एवं हवाले कडी है 0. जिस हिन्दी ब्लागजगत में 20000 चिट्ठे हो वहां सक्रियता संख्या 1931 पाना कोई कम बडी बात नहीं है. तो भाईयों इसी बहाने दे दो टिप्पणियां हमें भी हमारी अदाये हसीं हो कि ना हो हमारा कोइ महबूब हों कि न हों, आप फुरसद अवश्य निकालो टिपियाने का और जब टिपियाओगे तो सुन्दर सुवासित समीर हमारे एलीट मन में भी बहेगी.

साथियों विषय से विषयांतर हुए बिना हम बतलाना चाहते हैं कि 24 फरवरी 2008 से एक फोटू को पोस्ट बनाते हुए हमने इस ब्लॉग को शुरू किया था. इस फोटू को पब्लिश करने के पीछे हमारा उद्देश्य ही यही था कि लोग इस फोटू को देखें और जानें कि हमारा परिचय छत्तीसगढ़ के जनगीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा से भी है. और हॉं इस ब्लाग मे अपना अलंकरण 'झोंकते' फोटू भी इसीलिये लगाया कि लोग हमारे पोस्ट को पढे बिना भी जान जायें कि हम एलीट टाइप लोग हैं. जैसे ठेलों में ठेला वाले भईया लोग मंत्री और अभिनेताओं के साथ खिंचाये फोटूओं को टांगे रहते हैं वैसे ही हमने अपने ब्लॉग में इसे चिपका दिया है.

दुख तो ये भी है कि इतने बडे अलंकरण मिलने के बाद भी हमारे गुट के कोइ भी ब्लागर साथी ने हम पर केन्द्रित पोस्ट भी नही लिखा. क्या करोगे भाई सबको अपन अपना दुकान चलाना है और सब गल्ले मे ही बैठेंगे कहते है, समान दिखाने वाला कोइ भी नही. एसे में मेरा मठाधीश बनने का सपना कैसे पूरा होगा, पर क्या करें; अभी परिस्थितिया प्रतिकूल है. सुना है कि शनि की वक्र दृष्टि हम पर है. शर्मा जी को भी हमने अपनी कुंडली दिखा दी है, उनका कहना है कि अभी राजयोग नही आया है.

जब तक हमारा राजयोग नहीं आ जाता तब तक हम 'अगोर' रहे हैं. . . . खैर कुछ ब्लॉगर तो जान ही गये कि हमारा संबंध लक्ष्मण मस्तुरिहा जी से है और हमे राजभाषा अलंकरण भी मिल चुका है.

4 comments:

  1. # भारतीय नववर्ष 2067 , युगाब्द 5112 व पावन नवरात्रि की शुभकामनाएं
    # रत्नेश त्रिपाठी

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    टिप्पणी-१०००००१
    लड्डू बोलता है ...इंजीनियर के दिल से...
    laddoospeaks.blogspot.com

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  3. नव संवत्सर 2067 व नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं ..


    यह साल शुभ है मित्र..लगे रहो..सुवासित समीर बह चली है इस ओर!! :)

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  4. ले बोहागे भैया बने माहकत हे
    समीर बहीस त बने गमकत हे
    बने घुरवा कस भुरवा हो गेंव
    नवा पैरी छमाछम छनकत हे

    जय हो
    साहेब बंदगी साहेब

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