याद रखना चाहता हूँ मरहम लगाने वालों को

कितने ज़ख़्म दिये हैं तूने
कितने ज़ख़्म सहे हैं मैंने
मैं जल्दी भूल जाना चाहता हूँ
बस
याद रखना चाहता हूँ
मरहम लगाने वालो को
क्योंकि
उन्हीं के सहारे
तो, जी रहा हूँ मैं.

संजीव तिवारी
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1 टिप्पणियाँ:

  1. याद रखना चाहता हूँ
    मरहम लगाने वालो को
    क्योंकि
    उन्हीं के सहारे
    तो, जी रहा हूँ मैं.


    छोटी मगर सम्पूर्ण रचना

    पूरे भाव को व्यक्त करने में सफल

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