मोर संग चलव रे

छत्तीसगढ के जनगीतकार लक्ष्मण मस्तुरिहा के साथ संजीव तिवारी एवं संजीत त्रिपाठी जीवंत कविता पाठ सुने रवि रतलामी जी के रचनाकार में Tags: लक...
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चिनहा

चिनहा

चिनहा - संजीव तिवारी कईसे करलाई जथे मोर अंतस हा बारूद के समरथ ले उडाय चारो मुडा छरियाय बोकरा के टूसा कस दिखत मईनखे के लाश ला देख के माछी भि...
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सुरहुत्ती

सुरहुत्ती

सुरहुत्ती - संजीव तिवारी कहां ले बरही मनटोरा तोर तेल बिन दिया ह सुरहुत्ती के दिया ह दाउ मन बर ये मोर करम म त सिरिफ मोर मेहनत के चूहे तेल अ...
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छपास ले मन भले भरत होही पेट ह नई भरय

छपास ले मन भले भरत होही पेट ह नई भरय

इंटरनेट म हिन्दी अउ छत्तीसगढी के भरमार ल देख के सुकालू दाऊ के मन ह भरभरा गे वोखर बारा बरिस पहिली कोठी म छाबे भरूहा काडी ल गौंटनिन मेंर हेरवा...
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संगी-साथी