प्रिंट मीडिया में टिप्‍पणी चर्चा

प्रिंट मीडिया पर आजकल ब्‍लॉग पोस्‍टों की चर्चा एवं पोस्‍टों का प्रकाशन लगभग हर समाचार पत्र में हो रहा है, किन्‍तु छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित सांध्‍य दैनिक छत्‍तीसगढ़ के संपादकीय पन्‍ने पर चौपाल स्‍तंभ के तहत् मेरे ब्‍लॉगों में छत्‍तीसगढ़ के संपादकीय पन्‍नों के लेखों के ब्‍लॉग में पुन:प्रकाशन पर आये सार्थक टिप्‍पणियों को प्रकाशित किया जा रहा है,  मेरे पिछले पोस्‍ट 'अरुंधति से सहमत असहमत : कनक तिवारी' में आये विरोध (आदरणीय अम्‍बरीश जी) एवं आदरणीय अली भाई के टिप्‍पणी को आज छत्‍तीसगढ़ समाचार पत्र नें अपने संपादकीय पन्‍ने पर प्रकाशित किया है. प्रस्‍तुत है समाचार पत्र की कतरन (चित्र को क्लिक कर इमेज बड़ा कर पढें)- 







संजीव तिवारी

7 comments:

  1. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  2. मै इस बात से सहमत हूँ कि सरकार ने इन लोगों के साथ अन्याय किया पर जिस राह पर ये नक्सली चल रहे हैं धूसरे देश की सहायता लेकर समांतर सरकार और शेना बनाचुके हैं देश के ६-७ राज्यों में आतमकवाद फैला रहे हैं इससे क्या होगा क्या ुन्हें न्याय मिल जायेगा और परेशान कौन हो रहा है आम आदमी, कोई नेता तो नही होता ।

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  3. meri badhaai aur shubhkamnayen swekaar karen.
    http://udbhavna.blogspot.com/

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  4. ambarish ji ka kathan tarkik pratit hota hai....

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  5. प्रभावशाली प्रस्तुति।

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  6. समस्या का मुख्य कारण हैं की सरकार द्वारा वहां के स्थानीय लोगों की अनदेखी करना और उनकी उपेक्षा है . नक्सल समस्या से यदि सरकार को निपटाना है तो सबसे पहले सरकार को वहां की स्थानीय जनता का दिल जीतना पड़ेगा और स्वतंत्र नागरिकों की तरह वहां के लोगो को मूलभूत सुविधाए उपलब्ध करना होगा .

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  7. जानकारी के लिये शुक्रिया !

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